गुटखा माफिया रिमोट से गायब कर देता था कार की नंबर प्लेट

 

महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवला तालुका में गुटखा तस्करी के लिए हाईटेक तकनीक (रिमोट) की मदद से वाहन की नंबर प्लेट छिपाकर पुलिस को चकमा देने की साजिश का खुलासा हुआ है।

नासिक के देवला तालुका में मंगलवार रात करीब 8 बजे विठेवाड़ी स्थित आहेर वस्ती के पास शिव नाले के किनारे एक खेत में बने मकान से एक संदिग्ध कार स्थानीय युवकों को शिव नाले के रास्ते से गुजरती दिखाई दी। पिछले कुछ समय से इस रास्ते पर अज्ञात कारें और पिकअप वाहन लगातार आते-जाते देखे जा रहे थे। इस पर स्थानीय युवकों ने निगरानी रखी और मारुति सुजुकी (MH-41-BL-9848) कार को रोक लिया। चालक ने पूछताछ के दौरान गोलमोल जवाब दिए, जिससे संदेह और बढ़ गया।

इसके बाद स्थानीय युवकों ने आसपास के किसानों को बुलाकर वाहन की डिक्की की तलाशी ली। तलाशी के दौरान विमल समेत अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के पैकेट, गुटखे के सैकड़ों पाउच और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई।

इसकी सूचना तुरंत देवला पुलिस निरीक्षक सार्थक नेहते को दी गई। नेहते अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और लाखों रुपये मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा एवं तंबाकूजन्य पदार्थ जब्त कर लिया। इस मामले में हेमंत प्रभाकर पवार (निवासी भऊर, तालुका देवला) को हिरासत में लिया गया, जबकि गुटखा तस्कर कुणाल संजय मेने (निवासी खर्डे, तालुका देवला) को भी गिरफ्तार किया गया।

हालांकि, इस घटना में ग्रामीणों द्वारा पुलिस के हवाले किए गए दो संदिग्धों में से एक, जिसे इलाके का कुख्यात “गुटखा किंग” बताया जा रहा है, कथित तौर पर पुलिस थाने के परिसर में ही पुलिस वाहन का दरवाजा खोलकर छलांग लगाते हुए फरार हो गया। स्थानीय लोगों में इस घटना की चर्चा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी आरोपी कुणाल संजय मेने पुलिस को चकमा देकर भाग चुका है। यानी पुलिस ने माल तो जब्त कर लिया, लेकिन आरोपी उनके हाथ से निकल गया।

इस कार्रवाई में करीब 4.92 लाख रुपये मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा तथा 10 लाख रुपये कीमत की मारुति सुजुकी कार सहित कुल करीब 15 लाख रुपये का अवैध माल जब्त किया गया है। देवला पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, फरार आरोपी कुणाल संजय मेने के खिलाफ पहले से ही देवला, वणी और दिंडोरी पुलिस थानों में गुटखा तस्करी के चार से पांच मामले दर्ज हैं।

इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू गुटखा तस्करी में इस्तेमाल की गई अत्याधुनिक तकनीक रही। वाहन के आगे और पीछे लगी नंबर प्लेट के सामने रिमोट से नियंत्रित होने वाला एक काला पर्दा लगाया गया था। रिमोट का बटन दबाते ही कुछ ही सेकंड में नंबर प्लेट पूरी तरह ढंक जाती थी, जिससे वाहन का पंजीकरण नंबर दिखाई नहीं देता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस तकनीक का इस्तेमाल पुलिस, परिवहन विभाग और सीसीटीवी कैमरों को धोखा देकर प्रतिबंधित सामान की तस्करी के लिए किया जा रहा था।

Leave a Comment